PSEB 12th Class Hindi Solutions Chapter 13 डॉ० चन्द्र त्रिखा

Class 12 Hindi Chapter 13 डॉ० चन्द्र त्रिखा

Hindi Guide for Class 12 PSEB 12 डॉ० चन्द्र त्रिखा Textbook Questions and Answers

(क) लगभग 40 शब्दों में उत्तर दो:

प्रश्न 1.
‘जुगनू की दस्तक’ कविता का सार अपने शब्दों में लिखो।
उत्तर:
कवि कहते हैं कि घृणा के वातावरण में जुगनू की रोशनी भी पर्याप्त होती है। नदी कितनी ही काली हो किनारे कभी नज़रों से ओझल नहीं हो सकते। क्योंकि काली नदी की सीमाओं के आस-पास ही हरे-भरे, प्रदूषणरहित जंगल मौजूद हैं। अतः हमें यह कामना करनी चाहिए कि साहित्य की गर्मी से एक नई पौध अंकुरित होगी।

प्रश्न 2.
‘जुगनू की दस्तक’ एक आशावादी प्रतीकात्मक कविता है-स्पष्ट करें।
उत्तर:
प्रस्तुत कविता में घृणा और निराशा को अँधी गुफाओं एवं जुगनू को आशावाद का प्रतीक माना गया है। इसी तरह काली नदी आतंकवाद का प्रतीक है और सुख-समृद्धि हरे भरे जंगल और प्रदूषण को घुटन और संत्रास का प्रतीक माना गया है। कवि ने सम्भावना की पतवारें चलाते रहने से, जुगनू की रोशनी से, किनारा मिलने की अर्थात् घृणा, निराशा एवं आतंकवाद के समाप्त होने की आशा व्यक्त की है अतः कहा जा सकता है कि प्रस्तुत कविता एक आशावादी प्रतीकात्मक कविता है।

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प्रश्न 3.
‘जीने को कुछ मानी दे’ कविता में कवि क्या माँग रहा है ? अपने शब्दों में लिखो।
अथवा
जीने को कुछ मानी दे’ कविता का केन्द्रीय भाव लिखिए।
उत्तर:
कवि जीने को नया अर्थ प्रदान करने के लिए एक नई कहानी माँग रहा है। कुछ ऐसे तूफानी क्षण माँग रहा है जिससे जीवन में एक नया परिवर्तन आ सके। कवि संसार के दुःखों को समाप्त करने के लिए सातों समुद्रों का पानी माँग रहा है तथा अपने मन की व्यथा को मिटाने के लिए कोई पुरानी गज़ल माँग रहा है ताकि उसे गाकर वह अपने मन की व्यथा को अभिव्यक्त कर सके।

प्रश्न 4.
‘जीने को कुछ मानी दे’ कविता के शीर्षक की सार्थकता पर प्रकाश डालें।
उत्तर:
प्रस्तुत कविता में जीवन को नया अर्थ देने की कामना की गई है। कवि ने अपने साथी, अपने गुरु से जीवन को नए अर्थ देने की माँग की है। कवि उससे सारी धरती की प्यास बुझाने के लिए पानी की माँग कर रहा है ताकि धरती पर समृद्धि छा सके। शीर्षक भले ही प्रतीकात्मक है किन्तु सार्थक बन पड़ा है। .

(ख) सप्रसंग व्याख्या करें:

प्रश्न 5.
यह काली नदी …….. नयी पौध।
उत्तर:
कवि कहते हैं कि आतंकवाद की काली नदी कितनी ही बड़ी अर्थात् सीमा रहित हो किन्तु इसकी सीमा का कोई न कोई छोर तो होगा ही अर्थात् आतंकवाद को एक न एक दिन तो समाप्त होना ही है। कवि कामना करता है कि इस आतंकवाद के समाप्त होने के बाद निश्चय ही आपसी सौहार्द्र और भ्रातृभाव का हरा-भरा जंगल आएगा। जिसमें घुटन और संत्रास के प्रदूषण का नाम तक न होगा। कवि कहता है कि आओ मिलकर यह कामना करें कि अच्छे साहित्य रूपी अलाव की गर्मी से आपसी भाईचारे की पौध अंकुरित होगी और मानवता की भावना सब के दिलों में फिर से भर जाएगी। अतः हमें छोटी-से-छोटी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ना चाहिए।

प्रश्न 6.
जीने को कुछ ……. तूफानी दे।
उत्तर:
कवि कामना करता है कि उसे जीने के लिए एक नई कहानी मिल जाए। वह इतना प्यासा अर्थात् दुःखी है कि उस प्यास को बुझाने के लिए एक नहीं सात समुद्रों के पानी की ज़रूरत है। धूप अभी तक नंगी है. अतः इसे ढकने के लिए कोई धान के रंग की (हरी) चुनरी दो अर्थात् संघर्ष के साथ-साथ समृद्धि में भी बढ़ोत्तरी हो सके। कवि कहता है कि मेरा मन बहुत दुःखी है यह अपने दुःख को भुलाने को कोई गीत गाना चाहता है। इसलिए इसे कोई पुरानी गज़ल दो। हे ईश्वर ! तू मुझे कुछ ऐसा दे जैसा तू है मुझे जीने के लिए कुछ तूफानी क्षण प्रदान करो जिससे मेरे जीवन में एक नया परिवर्तन आ सके।

PSEB 12th Class Hindi Guide डॉ० चन्द्र त्रिखा Additional Questions and Answers

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
डॉ० चन्द्र त्रिखा का जन्म कब हुआ था?
उत्तर:
7 जुलाई, सन् 1945 में।

प्रश्न 2.
डॉ० त्रिखा की विशेष रुचि किसमें है?
उत्तर:
पत्रकारिता के क्षेत्र में।

प्रश्न 3.
डॉ० त्रिखा के द्वारा प्रमुख रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
पाषाण युग, शब्दों का जंगल, दोस्त ! अब पर्दा गिराओ।

प्रश्न 4.
कवि ने किस के लिए प्रयत्नशील बने रहने की प्रेरणा दी है?
उत्तर:
समाज से घृणा दूर करने की।

प्रश्न 5.
कवि ने ‘काली नदी’ किसे कहा है?
उत्तर:
आतंकवाद को।

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प्रश्न 6.
कवि ने समाज में जागरण को किसके माध्यम से लाना चाहता है?
उत्तर:
साहित्यकारों के माध्यम से।

प्रश्न 7.
कवि ने किसे नंगी कहकर चूनरधानी देने की बात कही है?
उत्तर:
धूप को नंगी कहकर।

प्रश्न 8.
कवि ने अलाव किसे कहा है?
उत्तर:
साहित्य को-जो समाज में भाईचारा और सौहार्द को बढ़ा दे।

प्रश्न 9.
‘जीने को कुछ मानी दे’-इसमें ‘मानी’ का क्या अर्थ है?
उत्तर:
मानी = अर्थ।

प्रश्न 10.
कवि का भीगा मन क्या करना चाहता है?
उत्तर:
गाना चाहता है।

प्रश्न 11.
कवि कैसी गज़ल को पाने की कामना करता है?
उत्तर:
पुरानी गजल की।

प्रश्न 12.
कैसे क्षणों की प्राप्ति कवि चाहता है?
उत्तर:
तूफ़ानी। वाक्य पूरे कीजिए

प्रश्न 13.
किनारे आखिर नज़रों से…….
उत्तर:
बच नहीं पाएंगे।

प्रश्न 14.
साहित्य के अलाव की गर्मी से………………
उत्तर:
अंकुरित हो गई नयी पौध।

प्रश्न 15.
सात समन्दर लेकर आ………………………..।
उत्तर:
प्यासा हूँ कुछ पानी दे।

प्रश्न 16. …………………कोई गज़ल पुरानी दे।
उत्तर:
भीगा है मन गाएगा।

हाँ-नहीं में उत्तर दीजिए

प्रश्न 17.
कवि के अनुसार आतंकवाद को प्रेम से दूर किया जा सकता है।
उत्तर:
हाँ।

प्रश्न 18.
हमें उम्मीद का आंचल छोड़ देना चाहिए।
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 19.
कवि किसी पुरानी गज़ल को मांगता है।
उत्तर:
हाँ।

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प्रश्न 20.
कवि अपने जीवन में परिवर्तन चाहता है।
उत्तर:
हाँ।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

1. ‘पाषाण युग’ रचना के रचनाकार कौन हैं ?
(क) डॉ० चन्द्र त्रिखा
(ख) डॉ० धर्मवीर भारती
(ग) निराला
(घ) पंत
उत्तर:
(क) डॉ० चन्द्र त्रिखा

2. ‘जुगनू की दस्तक’ किस विद्या की रचना है ?
(क) कविता
(ख) गद्य
(ग) खंड काव्य
(घ) महाकाव्य।
उत्तर:
(क) कविता

3. ‘जुगनू की दस्तक’ में कवि ने कैसे भविष्य की कल्पना की है ?
(क) सुंदर
(ख) धनी
(ग) सुनहले
(घ) शक्तिशाली।
उत्तर:
(ग) सुनहले

4. कवि ने आतंकवाद को किसकी संज्ञा दी है ?
(क) काली नदी
(ख) सामेर नदी
(ग) बड़ी नदी
(घ) छोटी नदी
उत्तर:
(क) काली नदी

डॉ० चन्द्र त्रिखा सप्रसंग व्याख्या

जुगनू की दस्तक

1. नफरत की अन्धी गुफाओं में
कई बार काफ़ी होती है
एक जुगनू की भी दस्तक
सम्भावनाओं की पतवारें
चलाते रहो साथियो!
किनारे आखिर नज़रों से
बच नहीं पाएंगे।

कठिन शब्दों के अर्थ:
नफरत = घृणा। अन्धी गुफ़ाओं = अँधेरी गुफ़ाओं। दस्तक = दरवाजा खटखटाने की क्रिया। पतवारें = चप्पू।

प्रसंग:
प्रस्तुत पद्यांश प्रसिद्ध पत्रकार डॉ० चन्द्र त्रिखा द्वारा लिखित काव्य संग्रह ‘दोस्त ! अब पर्दा गिराओ’ में संकलित कविता ‘जुगनू की दस्तक’ में से लिया गया है। प्रस्तुत कविता में कवि ने घृणा, आतंक को समाप्त कर देश के सुनहले भविष्य की कल्पना की है।

व्याख्या:
कवि कहता है कि घृणा की अँधेरी गुफ़ाओं में कई बार एक जुगनू का द्वार खटखटाना अर्थात् आना काफ़ी होता है। अतः हे साथियो ! तुम सम्भावनाओं के चप्पू चलाते रहो। क्योंकि किनारे कभी भी नज़रों से बच न पाएँगे। कवि का कहना है कि घृणा की अंधेरी रात में आशा और प्रकाश का प्रतीक छोटे से जुगनू का टिमटिमाना भी काफ़ी होता है। अत: तुम उम्मीद का दामन मत छोड़ो और अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समाज से घृणा दूर करने के लिए प्रयत्नशील रहो। लक्ष्य तुम्हें अवश्य प्राप्त होगा।

विशेष:

  1. कवि ने सदा आशावादी बने रहने की प्रेरणा दी है।
  2. भाषा सहज, सरल तथा भावपूर्ण है। प्रतीकात्मकता विद्यमान है।

2. कितनी ही असीम हो
यह काली नदी
पर सीमाओं की मौजूदगी को
नकार तो नहीं पाएगी।
बस इन्हीं सीमाओं के आस पास
मौजूद है हरे भरे जंगल
जहाँ प्रदूषण का, कहीं दूर तक नाम नहीं है।
आइए करें कामना
साहित्य के अलाव की गर्मी से
अंकुरित हो नयी पौध।

कठिन शब्दों के अर्थअसीम = सीमा रहित । काली नदी = आतंक की प्रतीक। नकारना = इन्कार करना। अंकुरित होना = फूटना, उगना।

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ डॉ० चन्द्र त्रिखा द्वारा रचित कविता ‘जुगनू की दस्तक’ में से ली गई, जिसमें कवि ने घृणा को प्रेम में बदलने के लिए प्रयत्नशील रहने के लिए कहा है।

व्याख्या:
कवि कहते हैं कि आतंकवाद की काली नदी कितनी ही बड़ी अर्थात् सीमा रहित हो किन्तु इसकी सीमा का कोई न कोई छोर तो होगा ही अर्थात् आतंकवाद को एक न एक दिन तो समाप्त होना ही है। कवि कामना करता है कि इस आतंकवाद के समाप्त होने के बाद निश्चय ही आपसी सौहार्द्र और भ्रातृभाव का हरा-भरा जंगल आएगा। जिसमें घुटन और संत्रास के प्रदूषण का नाम तक न होगा। कवि कहता है कि आओ मिलकर यह कामना करें कि अच्छे साहित्य रूपी अलाव की गर्मी से आपसी भाईचारे की पौध अंकुरित होगी और मानवता की भावना सब के दिलों में फिर से भर जाएगी। अतः हमें छोटी-से-छोटी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ना चाहिए।

विशेष:

  1. कवि सदा आशावादी बनने का संदेश देता है क्योंकि आशा के माध्यम से ही हमें अपना लक्ष्य प्राप्त हो सकता है।
  2. भाषा सहज, भावपूर्ण तथा प्रतीकात्मक है।

PSEB 12th Class Hindi Solutions Chapter 13 डॉ० चन्द्र त्रिखा

जीने को कुछ मानी दे…….

जीने को कुछ मानी दे
ऐसी एक कहानी दे।
सात समन्दर लेकर आ
प्यासा हूँ कुछ पानी दे।
धूप अभी तक नंगी है
इसको चूनर धानी दे।
भीगा है मन गाएगा
कोई गज़ल पुरानी दे।
दे कुछ तू रब्ब जैसा है
लम्हें कुछ तूफानी दे।

कठिन शब्दों के अर्थ:
मानी = अर्थ। चूनर = चूनरी, दुपट्टा । धानी = धान के रंग का अर्थात् हरा। भीगा = दुःखी। लम्हें = क्षण।

प्रसंग:
प्रस्तुत कविता ‘जीने को कुछ मानी दे’ कवि डॉ० चन्द्र त्रिखा के काव्य संग्रह ‘दोस्त ! अब पर्दा गिराओ’ में से ली गई है। प्रस्तुत कविता में कवि ने जीवन को नए अर्थ प्रदान करने की कामना की है जिससे वह संसार के सब दुःखों को दूर कर सके।

व्याख्या:
कवि कामना करता है कि उसे जीने के लिए एक नई कहानी मिल जाए। वह इतना प्यासा अर्थात् दुःखी है कि उस प्यास को बुझाने के लिए एक नहीं सात समुद्रों के पानी की ज़रूरत है। धूप अभी तक नंगी है. अतः इसे ढकने के लिए कोई धान के रंग की (हरी) चुनरी दो अर्थात् संघर्ष के साथ-साथ समृद्धि में भी बढ़ोत्तरी हो सके। कवि कहता है कि मेरा मन बहुत दुःखी है यह अपने दुःख को भुलाने को कोई गीत गाना चाहता है। इसलिए इसे कोई पुरानी गज़ल दो। हे ईश्वर ! तू मुझे कुछ ऐसा दे जैसा तू है मुझे जीने के लिए कुछ तूफानी क्षण प्रदान करो जिससे मेरे जीवन में एक नया परिवर्तन आ सके।

विशेष:

  1. कवि ने जीवन को सार्थक बनाने की कामना की है।
  2. भाषा सहज, भावपूर्ण एवं प्रतीकात्मक है।
  3. अनुप्रास अलंकार है।

डॉ० चन्द्र त्रिखा Summary

डॉ० चन्द्र त्रिखा जीवन परिचय

डॉ० चन्द्र त्रिखा जी का जीवन परिचय लिखिए।

चन्द्र त्रिखा का जन्म 7 जुलाई, सन् 1945 ई० को पाकिस्तान के जिला साहिलवाल के पाकपट्टन नामक स्थान पर हुआ। विभाजन के बाद आपका परिवार फिरोजपुर आ गया। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा अबोहर-फाजिल्का में हुई। आपने अम्बाला के एस०डी० कॉलेज से हिन्दी विषय में एम०ए० एवं पंजाब विश्वविद्यालय से पीएच० डी० की उपाधि प्राप्त की। पत्रकारिता में आपकी विशेष रुचि थी। आपने क्षेत्र के सभी दैनिक पत्रों में लगभग 30 वर्ष तक कार्य किया। आजकल आप स्वतन्त्र रूप से साहित्य सृजन कर रहे हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ पाषाणयुग, शब्दों का जंगल, दोस्त, अब पर्दा गिराओ हैं। इन्हें हरियाणा सरकार द्वारा पुरस्कृत किया गया जा चुका है।

डॉ० चन्द्र त्रिखा कविताओं का सार

‘जुगन की दस्तक’ कविता में कवि ने यह स्पष्ट किया है कि नफ़रत, घृणा और निराशा की अंधेरी रात में आशा का जुगनू भी उजाला सकता है। आतंकवाद प्रेम और सौहार्द्र द्वारा दूर किया जा सकता है तथा मानवता की भावना को जगाया जा सकता है। ‘जीने को कुछ मानी दें’ में कविता में कवि जिंदगी के नए अर्थ मांगता है। जिससे उसके जीवन में एक नया परिवर्तन आ सके तथा सर्वत्र समृद्धि छा जाए।

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